होली, रंगों का त्यौहार है, जिसे भारतवर्ष के हर कोने में उल्लास के साथ मनाया जाता है यह दो दिवसीय तयोहार  है, जिसमें पहले दिन संध्या में होलिका दहन किया जाता है और दूसरा दिन रंगों का होता है। यह त्यौहार फ़ालगुन के महिने में विभिन्न प्रकार से मनाया जाता है कहीं लोग रंगों से खेलते हैं तो कहीं फूलों से सिर्फ यही नहीं राधा की जन्मभूमि बरसाना में लोग लठियों से भी होली खेलते हैं यह पर्व मनुष्य के जीवन में एक बार फिर उल्लास भर देता है यह त्योहार को मनाने के भी अनेक कारण है और हर त्योहार की तरह ही लोग इसे भी अपने तरीके और विश्वास से मनाते है

पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार होली का त्यौहार बुराई पर अच्छाई की जीत को दर्शाता है कथा के अनुसार प्राचिन काल में एक राजा हिरण्यकश्यपु हुआ करता था जो स्वयं को भगवान मानता था,  उसके राज्य में कोई भी भगवान की पूजा अर्चना नहीं कर सकता था, कयोंकि उसकी प्रजा के लिए उनका राजा ही स्वयं भगवान था। परन्तु राजा हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रह्लाद बहुत बडा विष्णु भक्त था पिता के मना करने पर भी वह हर रोज भगवान विष्णु की पूजा किया करता था , इस बात से नाराज होकर राजा हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र  को मारने का फैसला किया राजा की अनेकों कोशिशों के बाद भी वह अपने पुत्र को मारने में सफल ना हुआ,  और आखिरकार अंत में उसने अपनी बहन  होलिका से सहायता मांगी। होलिका को कभी जलने का वरदान प्राप्त था, इसलिए वह प्रह्लाद को लेकर चिता पर बैठ गयी, परन्तु भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित बच गए और होलिका भस्म हो गयी इस प्रकार बुराई पर अच्छाई की विजय हुई

होली ब्रज का बहुत ही खास त्योहार है, कृष्ण और राधा का प्रेम दर्शाता है यह त्योहार ऐसा कहा जाता है की  एक बार भगवान कृष्ण माता यशोदा से कहते हैं कि– ‘ माँ राधा क्यूँ गोरी , मैं क्यूँ काला तब माता यशोदा कुछ वक्त सोचने के बाद  कृष्णा से  कहतीं हैं कि कृष्णा ऐसा कर कि  तू जाकर राधा को रंग लगा दे, फिर वो भी तेरे रंग की हो जायेगी और तब से राधाकृष्ण के इसी प्रेम भाव को दर्शाने के लिए होली का यह त्योहार मनाया जाने लगा

त्योहार एक रंग अनेक

यूँ तो भारत अपनी विविधता के साथ पूरे विश्व में प्रसिद्ध है यहाँ एक ही त्योहार को लोगो जाने कितने प्रकार से मनाया करते हैं , तो आईये जाने भारत के उत्तर प्रदेश में कैसे मनती है होली

  • बरसाना की होली

राधा की जन्मभूमि बरसाना, यहाँ की लठ्मार होली विश्व प्रसिद्द है होली के दिन यहाँ की महिलाएं अपने हाथो में लाठियां लेकर घरों से बाहर निकलती हैं , और अपने पुत्र/पति के साथ यह त्योहार मनाती हैं पुरूष अपने बचाव में ढाल लीये बैठे होते हैं और यदी उन्हें लाठी लग जाये तो वो स्त्री का वस्त्र पहन कर सडकों पर नितृ करते है यह मान्यता है कि भगवान कृष्णा एक बार राधा से होली  खेलने आते हैं, और वह राधा को रंगो से छेड़ रहे होते हैं तो बरसाना की महिलाएं राधा के साथ मिलकर उनको खूब है सताती हैं और फिर उन्हें महिलाओं की पोशाक पहनाकर नृत कराती हैं

  • फूलों की होली

वृंदावन , जिसे कृष्ण की भूमि कहतें हैं, यहाँ लोग रंगों के साथ ही साथ फूलों से भी होली खेलते हैं होली होली के दूसरे दिन ही यहाँ का दृश्य काफ़ी अलौकिक और अविस्मरणीय होता है चारों ओर सिर्फ और सिर्फ रंग और फ़ूल, यूँ प्रतीत होता है कि आप स्वयं कृष्ण के काल में चले गए हो

  • शमशान में होली

भारत में हर वो चीजें मुमकिन है, जो कोई सोच भी नहीं सकता और खास तौर पर तब जब हम बात करते हैं वाराणासी की यह शहर नहीं अपने आप में एक अजूबा है, जिसे साक्षात् भगवान शिव की नगरी कहते हैं वाराणसी में बसे मणिकर्णिका घाट को वरदान प्राप्त है कि यहाँ पर हर वक्त किसी किसी मनुष्य की चिता जलती रहेगी , फिर चाहे कड़ाके की सर्दी हो या बरसात होली के इस त्योहार को इसी घाट पर लोग चिता की राख के साथ मनाते हैं ,रंग की जगह वे एक दूसरे को राख लगाते हैं और शमशान में ही नाचते गाते हैं मान्यताओं के अनुसार स्वयं भगवान शिव यहाँ पधारते हैं और भक्तों के साथ राख की होली खेलते हैं

  • राधा गोपीनाथ मंदिर की होली

वृंदावन के राधा गोपीनाथ मंदिर में अनूठे रंग में मनता है यह त्योहार हिन्दू परम्परा के अनुसार एक विधवा  महिला को  एकदम साधा जीवन जीना होता है, उनके जीवन में कोई रंग और उल्लास नहीं होता एसी ही रूडीवादी सोच को मिटाने के लिए यहाँ की विधवा महिलायें भी रंगो और फूलों से होली का यह उत्सव मनाती हैं ,  वह एक दूसरे को अबीरगुलाल लगाती हैं और खूब खुशी से झूमती हैं   यह हमें इस बात का ध्यान कराता हैं कि  एक मनुष्य के जीवन में रंगों का होना  कितना महत्वपूर्ण है

रंग ना करें भंग

सम्भल कर खेले होली, क्युंकि यह त्योहार तो है बहुत ही मज़ेदार और सुन्दर हर त्योहार से अलग होता है यह होली का त्योहार, इस दिन लोग अपने सारे गिले शिक्वे मिटा कर एक दूसरे को दिल से माफ़ कर देते है और होली के दिन हर किसी को खुल के जीने का हक होता है,लोग अपने से छोटे छोटेबड़े सब के साथ मस्ती करते हैं, और फिर ये कहते हैं किबुरा मानो होली है पर मस्ती के साथ साथ हम सब को अपना और दूसरो का पुरा ख्याल  रखना चाहिए होली खेलते समय निम्न बातों का रखें ध्यान

  • केमिकल युक्त रंगों का प्रयोग करें
  • रंगो से  शरीर के नाजुक अँग बचाए (आँख, नाक ,कान )
  • राह चलते लोगों को रंग डालकर परेशान करें
  • पानी बर्बाद करे
  • अपने मज़े के लिए पशुओं पर रंग फेखे
  • किसी भी व्यक्ति के साथ अनुचित व्यवहार करें।
  • किसी भी प्रकार के नशे का सेवन करें
  • अभद्र भाषा का प्रयोग करें
  • हर्बल रंगो का प्रयोग करें
  • रंग खेलने से  पहले शरीर को अच्छी तरह तेल या क्रीम लगाए।
  • आंखो पर चस्मा पहने

होली का पूर्ण आनन्द ले और ध्यान रखें कि आप की वजह से किसी का त्योहार खराब हो आप सब को  होली की ढेरों शुभकामनाएं।।

Written By Abhishree Nagar